संपूर्ण श्री रामचरितमानस रामायण अर्थ सहित PDF Download (हिंदी अनुवाद) Shri Ram Charit Manas PDF

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श्री रामचरितमानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी में रचित एक इतिहास की घटना है। इस ग्रन्थ को अवधी साहित्य (हिंदी साहित्य) की एक महान कृति माना जाता है। इसे सामान्यतः ‘तुलसी रामायण’ या ‘तुलसीकृत रामायण’ भी कहा जाता है।

रामचरितमानस भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। उत्तर भारत में ‘रामायण’ के रूप में बहुत से लोगों द्वारा प्रतिदिन पढ़ा जाता है। शरद नवरात्रि में इसके सुन्दर काण्ड का पाठ पूरे नौ दिन किया जाता है। रामायण मण्डलों द्वारा मंगलवार और शनिवार को इसके सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता है।

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रामचरितमानस अर्थ सहित PDF Download (हिंदी अनुवाद)

  • Author: गोस्वामी तुलसीदास
  • Pages: 1242
  • Size: 74.92
  • Format: Application/PDF
  • Language: Hindi
  • Publisher: बेलवेडियर प्रिण्टिंग प्रेस, इलाहाबाद
  • Classification: वैदिक साहित्य
  • Keywords: रामायण
  • Title: रामचरितमानस
  • Type: Book

श्री राम चरित मानस | Shri Ramcharitmanas Book/Pustak Pdf Free Download

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गोस्वामी तुलसीदास का जीवन चरित्र

गोखामी तुलसीदास जी का जन्म विक्रमीय संवत् १५८६ में राजापुर जिला घाँदा में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्मा राम और माता का हुलसी था। किसी किसी के मत से ये पाराशर गोत्री पति औौजा के दुवे सरयूपारी ब्राह्मण और किसी के मत से कान्यकुब्ज थे। अत्यंत शैशव काल में ही माता-पिता का देहांत हो जाने से ये साधुओं की मांडली के साथ रहने और घूमने लगे थे । पर कुछ लोग कहते हैं कि ये मूल नक्षत्र में पैदा हुए थे

और ज्योतिष के अनुसार मूल नक्षत्र में जन्मा वालक पितृहंता होता है, उसका मुख पिता को न देखना चाहिए, इस कारण इनके पिता ने इनको त्याग दिया था और साधु लोग इनको सूकर क्षेत्र उठा ले गए थे। किंतु कोई भी माता पिता इस प्रकार अपने बच्चे को त्याग नहीं देता इससे उनका मर जाना ही समीचीन जान पड़ता है। जो हो, किंतु ये सुकरक्षेत्र (सोरों) में अपने गुरुदेव श्री नरहरिदास जी की शरण में बहुत काल तक रहे ।

तुलसीदास रामचरितमानस अर्थ सहित

श्रीरामचरितमानस १५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, जैसा कि स्वयं गोस्वामी जी ने रामचरित मानस के बालकाण्ड में लिखा है कि उन्होंने रामचरित मानस की रचना का आरम्भ अयोध्या में विक्रम संवत १६३१ (१५७४ ईस्वी) को रामनवमी के दिन (मंगलवार) किया था। गीताप्रेस गोरखपुर के संपादक श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार के अनुसार रामचरितमानस को लिखने में गोस्वामी तुलसीदास जी को २ वर्ष ७ माह २६ दिन का समय लगा था और उन्होंने इसे संवत् १६३३ (१५७६ ईस्वी) के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम विवाह के दिन पूर्ण किया था। इस महाकाव्य की भाषा अवधी है।

तुलसीदास की महिमा

हिंदी साहित्य के इतिहास में और विशेष कर उसके इस भाग के कवियों में तुलमीदास का स्थान सबसे ऊँचा है । सच पूछ जाय तो संसार के प्रधान प्रधान कवियों में तुलसीदास को एक गौरव का स्थान मिलना चाहिए था पर अब तक उनकी कृति का ऐसा प्रचार नहीं हुआ है कि लोग उनके गुणों का पूरा पूरा परि घय पाकर उनका यथोचित श्रादर करते ।

भारतवर्ष में इससे बढ़ कर तुलसीदास का और क्या श्रादर हो सकता है कि उनके राम चरितमानस का एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक प्रचार है। क्या राजा महाराजा सेठ साहकार, दंडी, मुनि, साधु, और क्या दीन हीन साधारण प्रजा सब में उनके मानस का यथोचित श्रादर है। बड़े बड़े विद्वान् से निरक्षर मट्टाचार्य तक उनके मानस से अपने मानस की तृप्ति करते और अपनी अपनी विद्या बुद्धि के अनुसार उसका रसास्वादन कर अपने को परम कृतकृत्य मानते तथा तुलसीदास की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हैं।

उनके रामचरित मानस ने भारतवर्ष और विशेष कर उसके उत्तर भाग का बड़ा उपकार भी किया है। रीति, नीति, आचरण, व्यवहार, सब बातों में मानो तुलसीदास ही हिंदू प्रजा मात्र के पथ-प्रदर्शक हैं। प्रत्येक विषय में उनकी चौपाइयाँ उधृत की जाती हैं और लोगों के लिये धर्मशास्त्र का काम देती हैं। न जाने इस ग्रंथ ने कितनों को डूबते से बचाया, कितनों की कुमार्ग पर जाने से रक्षा को, कितनों के निराशमय जीवन में श्राशा का संचार किया, कितनों को घोर पाप से बचाकर पुण्य मार्ग पर लगाया और कितनों को धर्म्मपथ पर डगमगाते चलने में सहारा देकर सम्हाला ।

कविता की दृष्टि से देखा जाय तो भी तुलसीदास जी का रामचरितमानस उपमाओं और रुपयों का मानो भांडार है। चरित्र-दर्शन में तो उन्होंने बड़ी ही सफलता पाई है।

रामचरितमानस के बारे में

इस चमत्कारपूर्ण ग्रंथ को गोसाईं जी ने संवत् १६३१ चैत्र शुक्ला ६ ( रामनवमी) मंगलवार को अपनी ४२ वर्ष की अवस्था में आरंभ किया था। गोसाई जी का सब से पहला ग्रंथ यही जान पड़ता है। इस ग्रंथ को उन्होंने अयोध्या में आरंभ किया था और अरण्यकांड तक बनाकर वे काशी जी चले गए और वहीं उन्होंने इसकी पूर्ति की ।

इसका नाम गोसाई जी ने ‘रामचरित मानस’ रक्खा था और इसमें सात सोपाने किए थे, पर लोक में इसका नाम रामायण और सोपानों का कांड प्रसिद्ध हुआ। गोसाई जी ने सांसारिक जीवों के कल्याण के लिये सप्त प्रबंध रूपी सात सीढ़ियोंवाले मानस (सरेविर) की रचना की है। इस तड़ाग में श्रीरामचंद्र जी का विमल चरित्ररूपी अगाध जल है, जिसमें श्री सीताराम के सुयश की लहरें उठ रही हैं, जल में प्रेम और भक्ति की मिठास और शीतलता है।

ऊपर से अनेक चौपाई रूपी सघन पुरइन फैली हुई है जिसमें छंद, सोरठा, दोहा रंग विरंगे कमल खिले हुए हैं। कमलों पर सुकृत रूपी भौंरे गुंजार कर रहे हैं और ज्ञान वैराग्य एवं विचार रूपी हंस तैर रहे हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी जलचर-जंतु भी इस मानस में हैं। जो लोग श्रादरपूर्वक इसको पढ़ते हैं और सुनते हैं वे हो इस मानस के अधिकारी हैं, जो विपयी श्रौर दुष्ट, गले और कौवे हैं उनकी इसमें पैठ नहीं हो पाती।

रामचरितमानस अध्याय

रामचरितमानस को तुलसीदास ने सात काण्डों में विभक्त किया है:

  • बालकाण्ड
  • अयोध्याकाण्ड
  • अरण्यकाण्ड
  • किष्किन्धाकाण्ड
  • सुंदरकाण्ड
  • लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड)
  • उत्तरकाण्ड

रामचरितमानस के रचयिता कौन है?

गोस्वामी तुलसीदास जी

रामचरितमानस किस भाषा में लिखी गई है?

अवधी भाषा में

रामचरितमानस में कितने कांड है?

रामचरितमानस को तुलसीदास ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम हैं - बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड

रामचरितमानस में कितनी चौपाई है?

इस ग्रंथ में 7 कांड हैं और उन्हीं के अंतर्गत इस ग्रंथ में 27 श्लोक, 4608 चौपाई, 1074 दोहे, 207 सोरठा और 86 छन्द हैं।

हनुमान चालीसा रामचरितमानस के किस कांड में

अकबर ने गोस्वामी तुलसीदास जी को कारागार में कैद करवा दिया। कारावास में गोस्वामी जी ने अवधी भाषा में हनुमान चालीसा लिखी।

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