Shani Chalisa PDF (श्री शनि चालीसा) in Hindi | शनि प्रदोष

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भाद्रपद माह का दूसरा प्रदोष व्रत आज, 18 सितंबर को पड़ रहा है। शनिवार का दिन होने के कारण ये शनि प्रदोष के विशिष्ट संयोग का निर्माण कर रहा है। प्रदोष का व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन शनि प्रदोष होने के कारण इस दिन शनिदेव के पूजन का विशेष विधान है। मान्यता है कि शनि प्रदोष के दिन भगवान शिव का शनि देव के मंत्रों से पूजन करने से भक्तों की कुण्डली में व्याप्त शनि दोष समाप्त हो जाते हैं। जिन लोंगो पर शनि की साढ़े साती या ढैय्या चल रही हो उन्हें शनि प्रदोष के दिन ये उपाय जरूर करना चाहिए।

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We will upload the Shani Chalisa PDF (in Hindi) / शनि चालीसा PDF to Shree Maharaj devotees. This prayer is one of the most famous prayers of Lord Shri Shani Dev Maharaj. All sins are removed by daily reading Shani Chalisa. Reciting the Shani Chalisa path every day will get rid of all his troubles, sorrow, and bad days. It gives you peace of mind, keeps all evils away, and makes your life happy, prosperous, and healthy.

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Name Shani Chalisa PDF (शनि चालीसा) in Hindi
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Language Hindi
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शनि प्रदोष पर ऐसे करें शनि चालीसा का पाठ, दूर होंगे सभी शनि दोष

शनि प्रदोष पर शनि मंदिर या शिव मंदिर में जा कर सरसों के तेल का दीपक जलाएं, इसमें काला तिल ड़ाल दें। इसके बाद शनि चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने शनि की साढ़े साती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है। शनि प्रदोष के दिन लोहे का सामान,जूते या पुराने कपड़े जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना लाभप्रद होता है.

शनि देवता को प्रसन्न करने के लिए इस तरह करें पाठ, सभी मनोकामनाएं होगी पूर्ण

शानि देव को प्रसन्न करने के लिए शनि चालीसा या पाठ किया जाता है. इसे करने से घर में सुख- समृद्धि आती है. साथ ही घर में धन की कमी नहीं होती है. इस पाठ को करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती है. पाठ करने से आपको क्रोध कम आता है और मन में शांति का अनुभव होता है.

शनिवार के दिन भगवान हनुमान का पाठ और चालीसा करना बहुत लाभदायक माना गया है. ऐसी मान्यता है कि अगर आप शनि दोष से पीड़ित हैं तो हनुमान चालीसा पढ़ने से सभी कष्ट दूर हो जाते है. इतना ही शनि की साढ़े साती से भी बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें.

शनि मंत्र

हर देवता का अपना मंत्र होता है जिसको विधि विधान से करने से वो प्रसन्न होते है. शनि के कष्टों से दूर होने के लिए आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. शनि देव के मंत्र का 40 दिन में 19000 बार जाप करने से शनि की साढ़े साती में बहुत लाभ देता है. भगवान शनि का मंत्र – ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्र्शराय नम: इन मंत्रों का जाप करने से शनि देव प्रसन्न होते है और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं.

Shani Chalisa (शनि चालीसा) in Hindi

Shani Dev is considered to be the judge of planets Saturn is behind the work done by every person and its fruits. Saturn’s livelihood, disease, and conflict are determined by Saturn itself. By making Shani happy, one can reduce the suffering of life. You can also get success in terms of career and money. If worshiping Shani Dev is understood and done with caution, it is immediately fruitful.

शनि चालीसा के लाभ:

शनिवार के दिन शनि मंदिर में श्री शनि चालीसा का पूर्ण विश्वास के साथ श्रद्धा पूर्वक पाठ करने से शनि देव से व्यक्ति जिस चीज की कामना करता है मिलने लगती है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। शनि देव की महिमा जिस पर भी हो जाती है वो गरीब से अमिर बन जाते हैं कमजोर से ताकतवर बन जाते हैं। शनि भगवान की चालीसा पढ़ने मात्र से ही लोगों के जीवन में बदलाव आने लगते हैं लोग अपने जीवन में खुशियाँ बटोरने लगते हैं उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती है।

शनि देव की पूजा अर्चना करने से जातक के जीवन की कठिनाइयां दूर होती है। सूर्यपुत्र शनिदेव के बारे में लोगों के बीच कई मिथ्या हैं। लेकिन मान्यता है कि भगवान शनिदेव जातकों के केवल उसके अच्छे और बुरे कर्मों का ही फल देते हैं। भगवान सूर्य जी के पुत्र शनिदेव जी महाराज जिनकी पूजा अर्चना मात्र से ही लोगों के दुःख दूर हो जाते है। शनि चालीसा का पाठ करने से ही लोगों के सारे कष्ट का निवारण हो जाता है।

शनि चालीसा का पाठ कैसे करना चाहिए | शनि चालीसा पाठ की विधि

अधिकतर लोगों के मन में आता है कि शनिदेव की असीम कृपा पाने के लिए पाठ कैसे करे या फिर शनि चालीसा का उच्चारण किस तरह किया जाना चाहिए? भक्तों चिंता कि कोई जरूरत नही है वैसे तो शनि महाराज अपने नाम के उच्चारण से ही बहुत खुश हो जाते है। यदि आप तब भी शनि महाराज जी कि चालीसा को सही से उच्चारित करना चाहते है तो बेफिक्र रहिये।

  1. सुबह सुबह जब आप सोकर उठते है तब सबसे पहले आपको अपनी दिनचर्या में सबसे पहले शौचालय जाना है वहां से आने के बाद आपको ब्रश करना है, नहाना है और फिर सूर्य महाराज को जल चढ़ाना है।
  2. जल चढ़ाने के बाद आपको शनि चालीसा पढ़ने के लिए जमीन पर एक आसन बिछाना है और शनि महाराज की फोटो रखनी है।
  3. यदि आपके पास शनि महाराज की फोटो नही है तो भी चलेगा, आपको अपने सर पर एक कपड़ा रखना है और श्री शनि चालीसा पाठ शुरू करना है, कोशिश करना जब भी आप शनि चालीसा पढ़े तो आपके आस पास शनि का माहौल हो और आपका फ़ोन आपसे काफी दूर हो।

FAQs on Shani Chalisa (शनि चालीसा)

शनि देव को प्रसन्न करने के मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि देव की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

शनि देव की पूजा शनि की मूर्ति के समक्ष न करें | शनि के उसी मंदिर में पूजा आराधना करनी चाहिए जहां वह शिला के रूप में हों | प्रतीक रूप में शमी के या पीपल के वृक्ष की आराधना करनी चाहिए

श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa) Lyrics

॥दोहा॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

॥ चौपाई ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥1॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥पिंगल, कृष्ो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥2॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥3॥

रावण की गतिमति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवाय तोरी॥4॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजीमीन कूद गई पानी॥5॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥6॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥शेष देवलखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥वाहन प्रभु के सात सजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥जम्बुक सिंह आदि नख धारी।सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥7॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥8॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥9॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥10॥

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